دردڈاکٹر بھاؤنا کنور
سڈنی (آسٹریلیا
کل جب وہ
میری گود میں آیا ،
بہت معصوم!
بہت کومل!اس سنگ
دل دنیا سے
اچھوتا سا ،
خاموش !
بالکل پرسکون!
نا کوئی دھڑکن
نا ہی کوئی ہلچل.
میرا صلونی ،
میرا ننمہا ،
بغیر دھڑکن کے میری بانہوں میں.
نہیں بھول پاتی
اس کا معصوم چہرہ ،
نہیں بھول پاتی
اس کا لمس.
بس جی رہیں ہوں
اس کی یادوں کے سہارے.
دیکھتی ہوں
ہر رات اس کا چہرہ
ٹمٹماتے تاروں کے درمیان
اور جب بھی کوئی تارا
مزید چمکدار ہوتا ہے ،
لگتا ہے میراننھا
لوٹ آیا ہے
تارا بن کر
اور کہتا ہے
"
مت رو ماں میں یہیں ہوں
تمہارے سامنے
میں روز دیکھا کرتا ہوں تمہیں
یوں ہی روتے ہوئے
میرا دل روتا ہے ماں
تمہیں یوں دیکھ کر
میں تو آنا چاہتا تھا ،
لیکن نہیں آنے دیا
ایک ڈاکٹر کی لاپرواہی نے مجھے
مٹا ہی ڈالا میرا وجود
اس دنیا سے ،
اس دنیا سے ،
پر ماں تم فکر مت کرو
میں یہاں خوش ہوں
میں یہاں خوش ہوں
کیوں کہ میں ملتا ہوں روز ہی تم سے
تم بھی دیکھا کرو مجھے وہاں سے.
نہیں چھین پاےگی یہ دنیا
اب کبھی بھی
یہ ملن ہمارا...سڈنی (آسٹریلیا)
تم بھی دیکھا کرو مجھے وہاں سے.
نہیں چھین پاےگی یہ دنیا
اب کبھی بھی
یہ ملن ہمارا...سڈنی (آسٹریلیا)
व्यथा
डॉ भावना कुँअर
कल जब वो
मेरी गोद में आया,
बहुत मासूम !
बहुत कोमल !
इस संग दिल दुनिया से
अछूता -सा,
शान्त!
बिल्कुल शान्त !
ना कोई धड़कन
ना ही कोई हलचल।
मेरा सलौना,
मेरा नन्हा,
बिना धड़कन के मेरी बाहों में।
नहीं भूल पाती
उसका मासूम चेहरा,
नहीं भूल पाती
उसका स्पर्श।
बस जी रहीं हूँ
उसकी यादों के सहारे।
देखती हूँ
हर रात उसका चेहरा
टिमटिमाते तारों के बीच
और जब भी कोई तारा
ज्यादा प्रकाशमान होता है,
लगता है मेरा नन्हा
लौट आया है
तारा बनकर
और कहता है-
"मत रो माँ मैं यहीं हूँ
तुम्हारे सामने
मैं रोज़ देखा करता हूँ तुम्हें
यूँ ही रोते हुये
मेरा दिल दुखता है माँ
तुम्हें यूँ देखकर
मैं तो आना चाहता था,
किन्तु नहीं आने दिया
एक डॉक्टर की लापरवाही ने मुझे
मिटा ही डाला मेरा वज़ूद
इस दुनिया से,
पर माँ तुम चिन्ता मत करो
मैं यहाँ खुश हूँ
क्योंकि मैं मिलता हूँ रोज़ ही तुमसे
तुम भी देखा करो मुझे वहाँ से।
नहीं छीन पायेगी ये दुनिया
अब कभी भी
ये मिलन हमारा…
-0-
सिडनी (आस्ट्रेलिया)
--
आदिल रशीद
Aadil Rasheed
http://aadil-rasheed-hindi.blogspot.com
भावना कुँअर की यह कविता दिल को पिंघला देने वाली और दहला देने वाली है । इस सृष्टि में भगवान् और माँ ही पीडा को पूरा -पूरा जान सकते हैं। भावना कुँअर की कविता में जो गहराई है , वह असाधारण है । मुश्किल यही है कि ऐसी शख़्सियत को समझने वाले कितने लोग हैँ ।मैं ऐसे साहित्यकार को हार्दिक नमन् करता हूँ ।
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